आर्म्स एक्ट के मामलों में अपील की नकेल पटना, जागरण ब्यूरो : पुलिस मुख्यालय ने आर्म्स एक्ट के छुट्टा घूम रहे सजायाफ्ता अपराधियों को अपील की नकेल से कसने की योजना सभी व्यवहार न्यायालयों तक पहुंचा दी है। डीजीपी अभयानंद ने बताया कि सभी व्यवहार न्यायालयों को लिखित रूप से यह अनुरोध किया गया है कि कोर्ट ने अपील की सुनवाई की जो तारीख तय की है उसपर हर हाल में अपील को सुन लिया जाये। यह स्पीड अपील की योजना का एक हिस्सा है और फिलहाल इसे आर्म्स एक्ट तक रखा गया है। पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में जिलों से यह आंकड़ा मंगवाया था कि आर्म्स एक्ट के तहत सजायाफ्ता हुए कितने लोग अपील में गये हैं। संख्या काफी है। इसके बाद पुलिस ने स्पीड अपील की योजना तैयार की। डीजीपी ने कहा कि पूर्व में अपील की जो तारीखें निचली अदालत ने तय कर रखी है उसमें परिवर्तन तो संभव नहीं है। इस बात को ध्यान रख न्यायालयों से यह अनुरोध किया गया है अपील सुनने की जो तारीख तय है उसपर हर हाल में अपील को सुन लिया जाये। अपील पर फैसले के तुरंत बाद संबंधित सजायाफ्ता को गिरफ्त में लेने या फिर अगली कार्रवाई के निर्णय में पुलिस को सहूलियत होगी। अभी सिर्फ आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों में पुलिस की ओर से न्यायालयों में आवेदन दिया गया है। दूसरे मामलों पर भी अपील के बारे में न्यायालय को आवेदन दिया जा सकता है। आंकड़े नहीं ब्योरा मंगा रहा पुलिस मुख्यालय पटना : स्पीडी ट्रायल पर पुलिस मुख्यालय ने फिर से अपने को केंद्रित किया है। हाल के दिनों तक जिलों से पुलिस मुख्यालय के पास स्पीडी ट्रायल के जो आंकड़े आ रहे हैं उसमें सिर्फ संख्या का जिक्र रहता है। यह बताया जाता है कि कितने लोगों को दस वर्ष तक की सजा हुई। कितने को आजीवन कारावास या फिर कोई और सजा। पुलिस मुख्यालय ने अब यह व्यवस्था की है कि जिलों से संख्या की बजाए उन मामलों का पूरा जिक्र भेजा जाये जिसमें सजा हुई है। डीजीपी का कहना है कि इसका मकसद उन मामलों की मानीटरिंग करना है जो चर्चित रहे हैं।
Ex Director General of Police- Bihar. A super Cop who designed super achievers of SUPER 30 , Special Auxiliary Police , Speedy Trials , BMP Hospital , Series of Super 30 in various part of India and many more feathers in his cap ....
Friday, October 14, 2011
Tuesday, October 11, 2011
डीएसपी के सीधे नियंत्रण में पुलिस और गाड़ी
दैनिक जागरण , पटना संस्करण लिखते हैं
DGP Abhayanand Initiative :-
डीएसपी के सीधे नियंत्रण में पुलिस और गाड़ी पटना, जागरण ब्यूरो :
पुलिस मुख्यालय ने जिला पुलिस बल को कंपनी में तब्दील किए जाने का आदेश सोमवार को जारी कर दिया। जिस जिले में छह कंपनी होगी, वहां एक बटालियन पुलिस बल की उपलब्धता हो जायेगी। जिलों के एसपी को इसका पूरा हिसाब-किताब लगाना है कि किस एसडीपीओ को कितनी कंपनी उपलब्ध कराई जाए। अब डीएसपी के पास अपनी फोर्स और गाड़ी होगी। पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में सैप को जिलों के पुलिस अधीक्षकों के नियंत्रण से मुक्त किया था। आला अधिकारियों का कहना है कि जिलों में इतनी संख्या में पुलिस बल हैं कि उनका सही आंकड़ा जिला पुलिस मुख्यालय तक में उपलब्ध नहीं है। इसके बाद भी डीएसपी को जब पुलिस बल की जरूरत पड़ती है तो वह एसपी से गुहार लगाने पहुंच जाते हैं। नयी व्यवस्था के तहत एसपी अपने अधीन कार्यरत सभी एसडीपीओ यानी डीएसपी को जरूरत के हिसाब से पुलिस बल की कंपनी उपलब्ध करा देंगे। पुलिस बल उसके अधीन काम करेंगे। डीएसपी को पुलिस बल के लिए कहीं नहीं जाना होगा। पुलिस मुख्यालय ने इनके लिए वाहनों की भी अलग से व्यवस्था कर दी गयी है। सूबेदार व जमादार स्तर के पुलिस अधिकारी कंपनी कमांडर के रूप में काम करेंगे। उन्हें इसका हिसाब रखना है कि उनकी कंपनी के जवान की तैनाती कहां है। अभी यह पता नहीं चल पाता है कि जिलों के पुलिस बल कहां-कहां बिखरे पड़े हैं। लाठी पार्टी और राइफलधारी पुलिस बलों का अलग-अलग हिसाब रखा जायेगा।
Monday, October 10, 2011
मिलिट्री की तरह कंपनी में तब्दील होगी जिला पुलिस
पटना, जागरण ब्यूरो : जिला पुलिस के जवानों का जत्था अब मिलिट्री कंपनी की तर्ज पर कंपनी में तब्दील हो जायेगा। पुलिस मुख्यालय ने जिला पुलिस बल को व्यवस्थित करने की दिशा में अपना काम आगे बढ़ाया है। बड़े जिलों में जिला पुलिस बल की उपलब्धता के हिसाब से कई पुलिस कंपनियां होंगी। प्रत्येक कंपनी की देखरेख के लिए एक पुलिस अधिकारी की तैनाती रहेगी। पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारियों का कहना है कि अभी जिला पुलिस बल का ढांचा पूरी तरह से तितर-बितर है। जिला पुलिस बल के कितने जवान कहां तैनात हैं इसकी सही-सही सूचना उपलब्ध नहीं है। कई बार तो इतनी संख्या में जिला पुलिस के जवान प्रतिनियुक्ति पर चले जाते हैं कि काम प्रभावित होने लगता है। कौन जवान कब छुट्टी पर गया यह भी जिला पुलिस मुख्यालय को सही समय पर मालूम नहीं हो पाता है। वहीं कुछ जिला पुलिस जवानों की संख्या इतनी अधिक है कि वह कई कंपनियों के बराबर है। इस बात को ध्यान में रख पुलिस मुख्यालय ने जिला पुलिस बल को कंपनी के रूप में संगठित किए जाने का फैसला लिया है। जिला पुलिस बल का संगठन यह होगा कि कंपनी दो तरह से तैयार होगी। लाठी बल और राइफलधारी जवानों का पुलिस बल। जिले के एसपी के पास लिखित तौर पर हर वक्त यह जानकारी होगी कि जिले में कितनी संख्या में राइफलधारी और लाठीधारी जवान हैं और उनकी तैनाती कहां है। एसपी के ठीक नीचे वाले रैंक के अधिकारी के स्तर से जवानों के मूवमेंट की मानीटरिंग हो। यह व्यवस्था लागू हो जाने के बाद संबंधित पुलिस प्रक्षेत्र के वरीय अधिकारियों के पास ही जवानों की उपलब्धता का पूरा ब्योरा होगा। छोटी-छोटी सूचनाएं भी तत्काल उपलब्ध हो सकेंगी।
Sunday, October 9, 2011
Abhayanand : Patna University Physics Record Holder..
राजनीतिक दबाव कुछ नहीं होता-अभयानंद, DGP (बिहार)
(बिहार के डीजीपी अभयानंद जी से तहलका के संवाददाता निराला की बातचीत.)
डीजीपी बनने के बाद अब आपकी जिम्मेवारियां बढ़ गयी हैं. आप फिजिक्स के पठन-पाठन और रहमानी-30 जैसी संस्थाओं को कितना समय दे पायेंगे?
समयाभाव तो कुछ होगा लेकिन एकदम से यह सब रूक जायेगा, यह असंभव है. पढ़ना-पढ़ाना मेरा पैशन है, इसे मैं नहीं रोक सकता. रही बात समय की तो कोई कितना भी व्यस्त हो, कुछ टाईम तो पर्सनल लाईफ के लिए निकाल ही सकता है. उसी समय को मैनेज कर इन संस्थानों में जाउंगा.
आप जिस समय में राज्य के पुलिस महकमे के मुखिया बने हैं,वह कानून-व्यवस्था की दृष्टि से क्या वाकई काफी अनुकूल दौर है?
स्थितियों के अनुकूल-प्रतिकूल की बजाय मैं यह मानता हूं कि पुलिसवालों के सामने हर रोज एक नयी चुनौती सामने होती है.
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
तीन साल से मैं मेनस्ट्रीम से दूर था, इसलिए अभी कुछ नहीं कह सकता लेकिन मुझे लगता है कि सबसे बड़ी चुनौती विभागीय संवादहीनता की है. आपस में ही संवादहीनता काफी है, इसलिए पब्लिक से भी संवादहीनता बढ़-सी गयी है. और इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती साख और विश्वसनीयता की है. अब तक तो मैं पुलिस महकमे को अलग-अलग इकाइयों के रूप में देखते रहा हूं. अब समग्रता में देखूंगा तो मेरी पहली कोशिश होगी कि साख और विश्वसनीयता बहाल हो. पुलिस के कहे पर लोग भरोसा करें.
बिहार में पुलिस-पब्लिक टकराव की घटनाएं तेजी से सामने आयी हैं. लोग बात-बेबात कानून हाथ में ले रहे हैं, पुलिसवाले भी आपा खो रहे हैं. इसकी क्या वजह मानते हैं और इससे पार पाने के क्या उपाय करेंगे?
हां मैंने भी मीडिया के माध्यम से कुछ घटनाओं के बारे में जाना है लेकिन अब असलियत क्या है, कारण क्या रहे हैं, इसे समझने की कोशिश करूंगा.मीडिया के खबरों से तो सबकुछ सच-सच नहीं जाना सकता न! न ही मीडिया की खबरों के आधार पर रणनीति तय की जा सकती है. वैसे मैंने पहले ही कहा कि पुलिसवालों के बीच आपसी संवादहीनता ही ज्यादा हो गयी है. उनके बीच आपसी विभागीय संवाद कायम हो, तब तो वे पब्लिक से संवाद कायम कर सकेंगे.
बिहार के नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में कुछ और नाम भी जुड़ गये हैं. नक्सली समस्या को कैसे देखते-आंकते हैं? किस तरह निपटना चाहेंगे?
मैं मानता हूं कि नक्सली समस्या की मूल वजह को अब तक जाना-पहचाना नहीं जा सका है. क्षेत्र और राज्य विशेष के अनुसार इस समस्या का अब तक आकलन किया जाता रहा है और उसी के अनुसार पार पाने के लिए प्रयोग किये जाते रहे हैं. कोई भी प्रयोग अब तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है लेकिन प्रयोग करना बंद भी तो नहीं किया जा सकता. मैं भी कुछ प्रयोग करना चाहूंगा, वह किस तरह का होगा, यह नहीं बता सकता. वैसे मैं नक्सलप्रभावित क्षेत्रों के अर्थशास्त्र को सबसे पहले समझने की कोशिश करूंगा.
आप कह रहे हैं कि कारण का ही पता नहीं चल सका है और प्रयोग भी असफल होते रहे हैं, तो क्या पिछले 44 सालों से नक्सलियों के खिलाफ तुक्काबाजी का अभियान चलाया जाता रहा है?
नहीं, ऐसा नहीं. कारण स्पष्ट नहीं है, यह कह रहा हूं लेकिन उसके बारे में एकदम से कोई जानकारी नहीं है, ऐसा भी नहीं है इसलिए तुक्काबाजी पर चलाया गया अभियान नहीं कह सकते.
पुलिस और पब्लिक के बीच जो दूरियां बढ़ी हैं, भरोसा खत्म हुआ है, उसे पाटने में कम्युनिटी अथवा सोशल पुलिसिंग जैसे अभियान की कितनी भूमिका देखते हैं आप?
पहले तो कोई भी पुलिसमैन एक मैन होता है. अब किसी आदमी की आदमीयता या मानवीयता किसी अभियान से तो जगायी नहीं जा सकती. अभियान तो एक ड्युटी की तरह हो जाता है. जब तक पुलिसवाले खुद से ही इसे अपने फर्ज की तरह नहीं लेंगे, बहुत कुछ बदलाव होगा, ऐसा नहीं लगता.
आपके पिताजी भी बिहार के डीजीपी थे. अब आप भी डीजीपी हैं. आपका पूरा पैशन फिजिक्स के अध्ययन-अध्यापन में है.एकेडेमिक क्षेत्र में ही क्यों नहीं कैरियर बनाये?
मैं पुलिस की सेवा में गलती से आ गया. इस सर्विस में आने के लिए जो मिनिमम योग्यताचाहिए, वही है मेरे पास. मैं पटना साइंस कॉलेज से साइंस ग्रेजुएट हूं. अपने बैच में टॉपर था. अपने सबजेक्ट का यूनिवर्सिटी टाॅपर था. शायद अब तक पटना विश्वविद्यालय में फिजिक्स में मुझे प्राप्त अंक रिकार्ड ही है. मैं चाहता तो था एकेडेमिक क्षेत्र में ही जाना लेकिन पटना में पढ़ने के दौरान ही देख लिया था कि यहां से और आगे जाने की ज्यादा संभावना नहीं इसलिए मैंने यूपीएससी की परीक्षा दी और फिर आईपीएस बन गया.
फिजिक्स और पुलिस के अलावा और कोई रुचि? साहित्य, सिनेमा, संगीत वगैरह में..!
ना, कोई खास रुचि नहीं है. साहित्य नहीं पढ़ता. सिनेमा जब एसपी था तो किसी-किसी हाॅल में बीच में ही जाकर बैठकर 10-15 मिनट देख लिया करता था. मुझे पढ़ने के तौर पर वही पसंद है,जिसे विज्ञान की कसौटी पर कसा जा सके. दर्शनशास्त्र पसंद है लेकिन खालिस नहीं, वैज्ञानिक चेतना वाला. इन दिनों ब्लैकमनी के शोर के बाद अर्थशास्त्र को भी समझने की कोशिश कर रहा हूं.
राजनीतिक दबाव को कैसे झेलते हैं अथवा झेलेंगे...?
दबाव कुछ होता नहीं, आप जानबुझकर उसे महसूस करते हैं. राजनीति इस पूरी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है, हर अंग को एक दूसरे से इंटरैक्ट होना पड़ता है, दबाव जैसा मैं कुछ नहीं मानता.
(साभार-तहलका)
Saturday, October 8, 2011
Wednesday, October 5, 2011
Tuesday, October 4, 2011
Sunday, October 2, 2011
शिक्षा के जरिये ही राष्ट्र का विकास संभव: डीजीपी
दैनिक जागरण , पटना संस्करण लिखते हैं :-
शिक्षा वह साधन है जिसके द्वारा समाज अपने आदर्शो का पल्लवन करता है। शिक्षा मानव के बौद्धिक, नैतिक व सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। शिक्षा के जरिये ही राष्ट्र का विकास संभव है। समाज को शिक्षित करने में शिक्षकों का योगदान है। उक्त बातें राज्य पुलिस महानिदेशक अभ्यानंद ने शनिवार को राजवंशी नगर विद्युत बोर्ड कालोनी स्थित डीएवी स्कूल में वृक्षारोपण करने के दौरान कहीं। भारतीय स्टेट बैंक की ओर से प्रायोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन की ओर से प्राचार्य रामानुज प्रसाद ने कहा कि डीजीपी प्रशासनिक सेवा में व्यस्त रहने के बावजूद सुपर 30 के माध्यम से अब तक सैकड़ों गरीब मेधावी छात्रों को आईआईटी प्रवेश परीक्षा में दाखिला दिलाया है। शिक्षा जगत में उन्होंने नवीन सूत्रपात किया है। इस अवसर पर सभी आगंतुक अतिथियों ने विद्यालय के बागीचे में एक-एक वृक्ष लगाये।
Tuesday, September 27, 2011
DGP Abhayanand to accept FIRs from 'harried' complainants
The Times of India Writes :
PATNA: DGP Abhayanand has initiated anovel move to accept FIRs from complainants shooed away by police stations.
While meeting people at his office chamber on Monday, the DGP came across two visitors - one from East Champaran and the other from Nalanda - who complained that their complaints were not being accepted by police station officials.
The top cop immediately ordered a junior officer to record their statements. After the statements were submitted to the DGP, he directed his office to send a runner to the two districts to ensure lodging of FIRs.
The DGP told TOI police stations normally don't refuse complaints about serious offences. They may, however, tend not to lodge FIRs in cases of minor scuffle or the like.
Asked if his move won't result in the DGP office becoming an extended police station, Abhayanand said that shouldn't be a problem. "At least I would know which district leads in refusing to accept FIRs," he said and added follow up remedial action would be initiated against erring cops.
The DGP said he would continue visiting the districts to have a first-hand feel of the problems facing the cops at the police station level and know what could be done at the police HQ level to solve them. He has already visited Rohtas and Gaya, and the next on his itinerary is Muzaffarpur district.
Sunday, September 25, 2011
Tackling official-criminal nexus not easy: DGP Abhayanand
PATNA: DGP Abhayanand on Friday said that the power of black money and nexus of corrupt officials and unscrupulous elements was dangerous affecting the law and order. He said that tackling normal law and order problem is easier than the law and order problem caused due to such nexus.
In an interaction with the members of trade and industry at the Bihar Industries Association (BIA) auditorium, Abhayanand said that it is a misconception that investments in the industries would come only when the law and order situation has improved. To drive home his point, he said that around five years back the NRIs attending a meet at Patna told him that they were least bothered about the law and order situation. They said that they wanted people here whom they could trust to run their units.
Replying to a query about tackling the problems of attack on public property and related incidents, the DGP said that the police would capture such incidents with camera to store evidence to be produced before the court in the cases of vandalism. He said that the police would not resort to lathicharge anymore while tackling such agitations. If the mob burns the police jeep, police firing is not necessary unless the life of the policemen is in danger, Abhayanand added. Once the people involved in damaging public property are photographed by the police, they would face six months' sentence on the basis of evidence documented in the camera and their chances of getting passport or gun license would be jeopardized, he said. BIA president S P Sinha talked about the concern of the industry on law and order situation, particularly inNaxal-infested districts.
IPS officials honour octogenarian cops
PATNA: It was evening of a different kind asIPS officers gathered at the IPS Mess here on Saturday to honour retired IPS officers who had attained the age of 80 years and also some of the widows of retired officers.
कालाधन व भ्रष्टाचार ही अपराध का जड़ : डीजीपी
पटना : कालाधन व भ्रष्टाचार अपराध की जड़ है। आर्थिक अपराध दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं। इसको नियंत्रित कर अपराध पर अंकुश लगाया जा सकता है। ये बातें बिहार उद्योग संघ के तत्वावधान में आयोजित बैठक में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अभ्यानंद ने कहीं।
डीजीपी ने कहा कि लोगों की रातोंरात अमीर बनने की चाहत नयी-नयी समस्या पैदा कर रही हैं। बड़े अपराधों के बदले छोटे-छोटे आर्थिक अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है। हाल के दिनों में धोखाधड़ी के कई मामले सामने आये हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस का मानवीय चेहरा लोगों के सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस को नकरात्मक से सकरात्मक बनाने के लिए कई कारगर कदम उठाये गये हैं। अब लोगों को गोली से नहीं कैमरे से शूट किया जा रहा है।
एक बार अपराधिक गतिविधियों में शूट हो जाने पर लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस को पहले मैन बनाने की कोशिश की जा रही है, उसके बाद पुलिसमैन बनाया जायेगा। मौके पर आये अतिथियों का स्वागत करते हुए बिहार उद्योग संघ के अध्यक्ष एस.पी.सिन्हा ने कहा कि अंग्रेजों द्वारा बनायी गयी कर प्रणाली ही भ्रष्टाचार का मुख्य वजह है। मौके पर संघ के महासचिव संजय खेमका, कोषाध्यक्ष सुबोध कुमार, पूर्व अध्यक्ष के.पी.एस.केसरी सहित कई उद्योगपतियों ने भाग लिया।
Saturday, September 24, 2011
कैमरे की गवाही ने आठ का चार्जशीट कराया
दैनिक जागरण , पटना संस्करण लिखते हैं :
पटना, जागरण ब्यूरो : कैमरे की गवाही ने आठ लोगों को पुख्ता अंदाज में अब अदालत के स्पीडी ट्रायल में घसीट लिया है। पुलिस की शूट नहीं शूटिंग के फंडे का असर कुछ यूं दिखा है कि इनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर दिए गए हैं। स्पीडी ट्रायल करा कर इन्हें सजा दिलाये जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है। डीजीपी अभयानंद ने पिछले दिनों यह आदेश जारी किया था कि कानून हाथ में लेने वाले लोगों पर बल प्रहार से पुलिस थोड़ा परहेज करे। ऐसे लोगों की वीडियोग्राफी करायी जाये। उक्त वीडियो फिल्म के आधार पर तत्काल वैसे लोगों के खिलाफ चार्जशीट कर उन्हें स्पीडी ट्रायल में ले आया जाये। कानून हाथ में लिए जाने की विभिन्न धाराओं में सजा का प्रावधान है और अब एक संशोधन के तहत पुलिस द्वारा तैयार करायी जाने वाली सीडी को इविडेंस के रूप में मान्यता मिल गयी है।
Friday, September 23, 2011
पुलिस-जनता के बीच हो बेहतर संबंध : डीजीपी
डेहरी-आनसोन (रोहतास) : अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस जनता के साथ बेहतर संबंध बनायें। बीएमपी (2) में गुरुवार को पुलिस सभा को संबोधित करते डीजीपी अभयानंद ने यह बातें कही। कहा कि संविधान विरुद्ध कार्य करने वाले असामाजिक तत्वों को कानून के तहत काबू किया जाएगा। जवानों व प्रशिक्षुओं की समस्याओं के निदान का आश्वासन दिया। जिले के दौरे के दूसरे दिन बीएमपी परेड मैदान में डीजीपी को जवानों ने सलामी दी। सशस्त्र बल के आईजी जितेन्द्र कुमार, डीआईजी सुनील सिन्हा व समादेष्टा रत्नमणी संजीव व महिला बटालियन के समादेष्टा अनसुईया रण सिंह ने डीजीपी का स्वागत किया। बीएमपी पुलिस मेंस यूनियन अध्यक्ष श्री नारायण यादव ने पुलिस सभा में जवानों की समस्याओं से अवगत कराते हुए पे ग्रेड में सुधार की मांग की। डीजीपी ने बीएमपी अस्पताल, कार्यालय व फायरिंग रेंज का भी निरीक्षण किया। फायरिंग रेंज में उन्होंने कारबाइन व पिस्तौल से फायरिंग का अभ्यास भी किया।
Thursday, September 22, 2011
Bihar police doing its best to tackle naxal insurgency: DGP Abhayanand
PTI | 06:09 PM,Sep 21,2011
Dehri-on-Sone, Sep 21 (PTI) Bihar police was striving hard to tackle Naxal insurgency in the state with optimum use of resources, a top police official said today."The state police is doing its best to tackle naxal insurgency in Bihar with resources at its disposal," Director General of Police (DGP) Abhayanand told reporters here.There will be no let up in the effort of the state police to deal with naxal violence, he said.On the spate in custodial deaths in Bihar in recent times, Abhayanand said he will ensure that the personnel found guilty in such cases were suitably punished so that such incidents did not recur anywhere in future.Abhayanand, who took charge as the DGP last month, said his sole priority was to establish a rule of law by bringing law-breakers to justice while to ensure that no innocent person was framed in false cases.Abhayanand was here for inspection at Rhotas district police headquarters.He also heard the grievances of the policemen and said that he will undertake tour of entire state to hear their problems and redress the same.
Wednesday, September 21, 2011
DGP Abhayanand in Dehri - On- Sone
Sep 21, 08:24 pm

डेहरी-आनसोन (रोहतास) : पुलिस कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार कृतसंकल्प है। पुलिस के लिये कानून ही अस्त्र है और वही ढाल भी। ऐसे में कानून के दायरे में रह कर किया जाने वाला कार्य कभी दुखदायी नहीं हो सकता। डीजीपी बनने के बाद पहली बार जिले में आये अभयानंद ने बुधवार को पुलिस लाइन में पुलिस सभा को संबोधित करते हुए अपने कर्तव्य व दायित्वों का बोध कराया। आम जनता से बेहतर संबंध बना अपराध नियंत्रण में उनका सहयोग लेने को कहा।
पुलिस मेंस यूनियन के जिलाध्यक्ष अखिलेश्वर सिंह ने पुलिस कर्मियों की समस्याओं से अवगत कराया। पुलिस लाइन में आवास, शौचालय व मेस की व्यवस्था बेहतर व उग्रवाद क्षेत्र में कार्यरत पुलिस कर्मियों को नक्सल भत्ता भी देने की मांग की। एएसआई व एसआई संवर्ग के अधिकारियों ने केस डायरी की कमी की ओर ध्यान दिलाया। कहा कि केस डायरी के अभाव में कांडों के निष्पादन में अनावश्यक विलंब हो रहा है। उन्होंने बीएमपी के आरमर हवलदार गोपाल शर्मा को अग्नेयास्त्रों की बेहतर ढंग से तकनीकी जानकारी देने पर उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की। इस मौके पर डीआईजी सुशील एम खोपड़े, एसपी मनु महाराज, एएसपी कुमार अमर सिंह के अलावा अन्य पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।
जिलों में पुलिस के कामकाज की समीक्षा के मिशन के तहत यहां के दो दिवसीय दौरे पर आये पुलिस महानिदेशक ने तीसरे पहर संवाददाताओं से मुखातिब होते हुये कहा कि राज्य के तमाम जिलों में जाकर विभाग की समस्याओं से अवगत होने की योजना की शुरूआत रोहतास से कर रहा हूं। पुलिस अगर कानून की परिधि में रह कर काम करेगी तो न किसी की हाजत में मौत होगी और न अपराधी खुलेआम घूमते फिरेंगे। जिले की नक्सली समस्या से निबटने के लिये जिले से सटने वाली उत्तर प्रदेश व झारखंड की सीमाओं पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किये जा रहे हैं। इसके लिये जिले को समुचित संसाधन उपलब्ध कराये जा रहे हैं।
बिहार पुलिस अब उपद्रवियों को करेगी 'शूट'
नवभारत टाईम्स - इंटरनेट संस्करण लिखते हैं -
पटना।। हाल के दिनों में बिहार में जनता और पुलिस के बीच हुए टकराव के मामलों में पुलिस की ' बदनामी ' हुई है। पुलिस ने इस तरह की ' बदनामी ' से बचने के लिए एक नायाब तरीका निकाला है। बिहार पुलिस अब उपद्रवियों से निपटने के लिए डंडे का इस्तेमाल नहीं करेगी बल्कि उन्हें 'शूट' करेगी। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन डीजीपी अभयानंद ने राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को उपद्रवियों से निपटने के लिए उन्हें 'शूट' करने का आदेश दिया है। यहां पर 'शूट' से मतलब उनको गोली मारने से नहीं बल्कि विडियो बनाने से है।
नए तरीके के तहत पुलिस अब भीड़ से निपटने के लिए लाठी और बंदूक ले जाने की बजाए कैमरा लेकर जाएगी।
अभयानंद ने मंगलवार को बताया कि कैमरे की मदद से उपद्रवियों की हरकतों का विडियो बनाया जाएगा और बाद में इसी को साक्ष्य बनाकर उन उपद्रवियों को कोर्ट से सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि विडियो फुटेज देखकर पुलिस बदमाशों की भी पहचान कर सकेगी और उनके खिलाफ मामला दर्ज कर सकेगी। इस तरह फास्ट सुनवाई के जरिए अपराधियों को सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी।
एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि हमें संयम बरतने का निर्देश मिला है। इसमें सिर्फ एक लाइन लिखी है, 'शूट विद कैमरा नॉट विद वेपन।'
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरकीब से दंगे, आगजनी और छोटी-छोटी बातों को लेकर होने वाले सड़क जाम जैसी स्थितियों से निपटने में अवश्य सहायता मिलेगी। जब उपद्रवियों को सजा मिलने लगेगी तो ऐसे मामलों पर रोक लगाया जा सकेगा। गौरतलब है कि बिहार पुलिस विडियो फुटेज देखकर पहले भी कई मामले निपटा चुकी है।
एक अन्य अधिकारी बताते हैं कि कानून में हुए संशोधन के तहत सबूत के तौर पर विडियो फुटेज का उपयोग किया जा सकता है। उनका कहना है कि फुटेज के आधार पर जनप्रतिनिधियों से मदद ली जाएगी जिससे सबूत जुटाने में पुलिस को और आसानी होगी।
पटना।। हाल के दिनों में बिहार में जनता और पुलिस के बीच हुए टकराव के मामलों में पुलिस की ' बदनामी ' हुई है। पुलिस ने इस तरह की ' बदनामी ' से बचने के लिए एक नायाब तरीका निकाला है। बिहार पुलिस अब उपद्रवियों से निपटने के लिए डंडे का इस्तेमाल नहीं करेगी बल्कि उन्हें 'शूट' करेगी। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन डीजीपी अभयानंद ने राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को उपद्रवियों से निपटने के लिए उन्हें 'शूट' करने का आदेश दिया है। यहां पर 'शूट' से मतलब उनको गोली मारने से नहीं बल्कि विडियो बनाने से है।
नए तरीके के तहत पुलिस अब भीड़ से निपटने के लिए लाठी और बंदूक ले जाने की बजाए कैमरा लेकर जाएगी।
अभयानंद ने मंगलवार को बताया कि कैमरे की मदद से उपद्रवियों की हरकतों का विडियो बनाया जाएगा और बाद में इसी को साक्ष्य बनाकर उन उपद्रवियों को कोर्ट से सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि विडियो फुटेज देखकर पुलिस बदमाशों की भी पहचान कर सकेगी और उनके खिलाफ मामला दर्ज कर सकेगी। इस तरह फास्ट सुनवाई के जरिए अपराधियों को सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी।
एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि हमें संयम बरतने का निर्देश मिला है। इसमें सिर्फ एक लाइन लिखी है, 'शूट विद कैमरा नॉट विद वेपन।'
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरकीब से दंगे, आगजनी और छोटी-छोटी बातों को लेकर होने वाले सड़क जाम जैसी स्थितियों से निपटने में अवश्य सहायता मिलेगी। जब उपद्रवियों को सजा मिलने लगेगी तो ऐसे मामलों पर रोक लगाया जा सकेगा। गौरतलब है कि बिहार पुलिस विडियो फुटेज देखकर पहले भी कई मामले निपटा चुकी है।
एक अन्य अधिकारी बताते हैं कि कानून में हुए संशोधन के तहत सबूत के तौर पर विडियो फुटेज का उपयोग किया जा सकता है। उनका कहना है कि फुटेज के आधार पर जनप्रतिनिधियों से मदद ली जाएगी जिससे सबूत जुटाने में पुलिस को और आसानी होगी।
उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में अररिया के फारबिसगंज और नालंदा में उपद्रवियों से निपटने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इन घटनाओं के बाद जहां बिहार पुलिस को चारों तरफ आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा वहीं सरकार को भी फजीहत झेलनी पड़ी थी। इसके अलावा भीड़ द्वारा भी कानून को हाथ में लेने से पुलिस को परेशानी होती रही है, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो जाती है।
अभयानंद के रात्रि आगमन की सूचना पर मची खलबली
दैनिक जागरण - इंटरनेट संस्करण लिखते हैं :
डीजीपी के रात्रि आगमन की सूचना पर मची खलबली
Sep 20, 10:27 pm
जागरण संवाददाता,आरा: प्रदेश के नये पुलिस महानिदेशक अभयानंद के मंगलवार की रात औचक निरीक्षण पर निकलने को लेकर भोजपुर एवं रोहतास जिले के पुलिस अफसरों में घंटों खलबली मची रही। रात के करीब 9 बजे के आसपास आरा शहर में प्रवेश किये। कोईलवर पुल पर पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद कर दी गई थी। वहां पर कुछ समय के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी एवं अफसरों से पूछताछ कर आगे निकल पड़े। रोहतास जाने के रास्ते में पड़ने वाले सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया था। रात में जैसे ही डीजीपी के रोहतास जाने की सूचना मिली तो पुलिस के आला अफसरों की मोबाइल की घंटियां टनटनाने लगी रहीं। स्वयं पुलिस अधीक्षक एम.आर नायक आगवानी को कोईलवर की ओर निकल पड़े। चूंकि डीजीपी बनने के बाद उनका पहला आगमन था इसलिए कोई भी चूक न हो इस पर पूरा ख्याल रखा गया। पुलिस महानिदेशक उदवंतनगर, गड़हनी, चरपोखरी , पीरो , हसनबाजार एवं बिक्रमगंज के रास्ते रोहतास के लिए रवाना हुए। इस दौरान रास्ते में सभी थानाध्यक्षों को चौकस कर दिया गया था। वे आरा में नहीं रूके। सीधे रोहतास के लिए रवाना हो गये। डीजीपी वहां अपराध नियंत्रण की समीक्षा करेंगे।
( लिंक साभार : श्री सर्वेश , बंगलौर )
Tuesday, September 20, 2011
अब शूट नहीं, शूटिंग करेगी पुलिस
दैनिक जागरण , पटना संस्करण लिखते हैं
पटना, जागरण ब्यूरो : पुलिस अब शूट नहीं शूटिंग करेगी। पुलिस की लाठियां चटकातीं तस्वीर और फिर कई दफे फायरिंग (शूट) की नौबत को ध्यान में रख पुलिस ने अब नयी तरकीब निकाली है। तरीका ऐसा कि हंगामा करने वाले देखते ही भागने लगें। डीजीपी अभयानंद ने बताया कि उन्होंने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को यह निर्देश दिया है कि थानों को यह हिदायत दें कि किसी भी तरह के हंगामे में वीडियोग्राफी की जरूर व्यवस्था रखें। अगर मौके पर वीडियो कैमरे की व्यवस्था नहीं हो पाती है तो मोबाइल कैमरे से शूट कर लें। डीजीपी अभयानंद ने बताया कि 2009 में प्रदर्श (इविडेंस) को लेकर कानून में संशोधन किया जा चुका है। अब इविडेंस के रूप में सीडी को भी मान्यता है। पुलिस हंगामा कर रहे लोगों की वीडियोग्राफी पूरे शांत भाव से करायेगी। कहीं से कोई बल प्रयोग नहीं। उक्त सीडी को साक्ष्य के रूप में पुलिस अपने पास रखेगी। न्यायालय में उक्त सीडी के आधार पर संबंधित व्यक्तियों पर स्पीडी ट्रायल चलाया जायेगा। तय आईपीसी के तहत उन्हें सजा दिलायी जायेगी। एक बार सजायाफ्ता हो गये तो न तो नौकरी मिल सकेगी और न ही किसी अन्य सरकारी लाभ को हासिल कर सकेंगे। डीजीपी ने कहा कि आम तौर पर विधि-व्यवस्था को हाथ में लेने वाले लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 426 और 341 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। 147 का संबंध दंगा से, 341 का रोड जाम है। इन धाराओं के तहत थाने से ही जमानत मिल जाती है पर इसमें सजा भी हो सकती है।
Monday, September 19, 2011
DGP Abhayanand - ‘Confiscation of property has just begun, already serving as a deterrent’
How do you plan to improve law and order in Bihar?
We are trying to get at the root of the nature of crimes. The crime pattern six years earlier was mainly about the power of guns for extortion of money. Now we have to trace those who are acquiring money illegally in connivance with public servants. A group of wrongly empowered people may have been behind most recent crimes. The trend looks dangerous but we plan to out-think them.
How would you get at those not yet framed in corruption cases?
We are strengthening our economic offences wing to trace these people. We are keeping an eye on the assets of public servants. Key departments are being identified where there is the maximum chance of complicity [in corruption] of government servants and private parties. There is no need for any fresh laws; the existing IPC provisions and anti-corruption laws are good enough to send them behind bars. We have worked something out with the advocate-general and don’t want to reveal more at this stage.
Do you think the few cases of confiscation of public servants’ property are good enough a deterrent?
It has just begun. More cases can come to light as we investigate. As for the first property confiscation case, one can see the public response. It has already started serving as a deterrent.
What is your take on the subject of Bihar deploying over 9,000 special police officers (SPOs) in Naxal areas as against the Supreme Case stand on this?
Even we hold that empowering Naxal-affected people with guns is not the solution. It is a short-term measure that can be phased out as soon as we have more socio-economic interventions in these areas. Dozens of welfare schemes by the Central and state governments have been going on. We have to monitor these schemes from the policing perspective and win the confidence of people.
Do you not think that a specialised Special Auxiliary Police for Naxal areas will be demoralised with lack of coordination with the district police?
We have now put the SAP, formed with retired Army jawans, under the Additional DGP, law and order, and then under the IG (Operations). If an SP wants deployment in SAP, he has to coordinate with the ADG and the IG. We have to take better care of SAP personnel’s welfare, including good food and lodging, for sure.
What are you doing to prevent corruption at constables’ level?
We are not denying corruption at their level. Punitive action is one part; we are also thinking about a long-term solution — giving them dignity, good salary and better working conditions. We have some definite plans for them. We need some time (The DGP is due to retire in December 2014).
By doing so, are not you replicating the
Super 30 model in policing, which may not work?
We mustn’t think just as men in uniform. We have to take everything holistically. Policemen are from this society itself, with similar needs. A humane approach can work well.
We hear that you have started a one-on-one interaction with SPs.
SPs are leaders, managers of their districts in modern terms. We need to identify problems. My process could take time but may yield good results.
Will you continue to take Super 30 classes?
Yes. My role is one of guidance. I take classes depending on my schedule. That does not put any extra burden on my work as a police officer.
Wednesday, September 14, 2011
ATM likely in each police line
PATNA: In order to facilitate quick drawal of cash from bank by police constables and their family members, the police headquarters is planning to install at least one ATM of State Bank of India (SBI) in each police line across the state.
DGP Abhayanand in Delhi to attend DGs conference
Times of India reports
PATNA: A three-member Bihar police team led by DGP Abhayanand will attend the DGs' conference to be held in Delhi from September 15.
ADG (special branch) A S Nimbran and ADG (law and order) P N Rai will accompany the DGP to the three-day conference which would be addressed by Prime Minister Manmohan Singh. The conference is expected to discuss the rise in Maoist and terrorist activities in the country.
Sunday, September 11, 2011
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